मंगलवार, 10 नवंबर 2015

सफ़र फिर से रफ़्ता - रफ़्ता  शुरू करें। 


देश की राजनिती मैं बहुत सारे पैबंद हैं  लकिन इनसे किसी को लेना देना नहीं क्योंकि यहाँ सारे इमोश्नल  फूल हैं । 
और यहाँ के नेता ऐसी जनता को वेवकूफ़ बनाना खूब जानते हैं । 
लिखना कुछ चाहता था लिख कुछ रहा हूँ ,लेकिन जो मैं लिखना चाहता हूँ। उसका सीधा संबंध हम सबसे हे । 
ये बात हे २००१ के आस पास की तब देहली मैं था और फ्रीलान्स काम कर रहा था । 
तभी  एक दिन मुझे एक कॉल आया भोपाल जाना हे एक शूट हे ,मैं यहाँ पर किसी का नाम नहीं  लिखना चाहता हूँ । 
और एक हिदायत भी दी गई की इस शूट के बारे मैं किसी से ज़िक्र नहीं करना जब तक हम नहीं कहते हैं । 
मुझको सिर्फ अपने काम और दाम से मतलब था मैंने कहा ठीक हे मैं किसी के साथ भी इस शूट का ज़िक्र नहीं करूँगा । 
और फिर तय तारीख़ को हम सब पालाम एयरपोर्ट पर थे । 
हम कुल मिलाकर ५ लोग थे । मेरा परिचय वहां पर मौजूद एक सरदार जी से कराया गया । 
जो की किसी सांसद के बेटे थे और वो सांसद पंजाब से सांसद थीं । मुझे क्या लेना देना इन सब बातों से काम करना हे । 
और फिर हम सब भोपाल की फ्लाइट मैं थे अगर मेरी याददास्त ठीक हे तो कुल मिलकर पूरी फ्लाइट मैं १० लोग होंगे । 
फ्लाइट के अंदर का ढांचा मंशा अल्ला था किसी बटन को दबाओ बटन हाथ मैं पुरे सफ़र मैं खड़ खड़  की आवाज़ । 
 एक डर सा लग रहा था बस सही सलामत भोपाल आ जाये । 
और फिर मुझे उस छोटे से रास्ते मैं शूट क्या करना हे और कैसे करना हे  शूट क्या बताया गया । 
और मुझे तब पहली बार बोला गया की ई.वी.म मशीन का शूट करना हे । 
यानि हमारी वोटिंग मशीन का और वो हमारे साथ मैं थी । 
और कुछ देर बाद आवाज़ आई की आप अपनी बेल्ट को बांध लें । 
इसका मतलब साफ़ था की भोपाल आ गया कोई अनहोनी घटना नहीं हुई । 
और हम कुछ देर बाद उस होटल मैं थे जहाँ शूट करना था और रुकना भी वहीँ था । 
लेकिन कुछ देर बाद पता चला जिन लोगों के साथ शूट करना हे वो नागपुर से आ रहे हैं और भोपाल तक  आने मैं टाइम लगेगा। 
और फिर क्या इंतज़ार पूरी रात सुबह २ लोग  नज़र आये पता चला की ये लोग ही ई.वी.म  का ऑपरेशन करेंगे । और  शुरू हुआ ऑपरेशन का दौर क्योंकि बंद कमरे मैं शूट करना था । 
अपने ओजार के साथ मशीन के अंजर - पंजर खोल के सारे बहार  किये  सिर्फ एक चिप चेंज की और  फिर मशीन को बंद किया । 
जैसा की उन दोनों ने बताया की वो साऊथ से ले कर नार्थ तक ये  काम करते हैं । 
इसके अंदर एक चिप को ही चेंज करना होता हे और उसको बदलने मैं सिर्फ १० मिनट लगते हैं । 
अब ये काम किस तरह करता हे, ये भी मालूम हो तो,
इसके काम करने का तरीका बिलकुल सीधा हे आप जिस नेता को जिताना चाहते हैं उसको किस प्रतिशत के हिशाब से वोट ट्रांसफर  हो वो सेट कर दिया जाता हे 
अगर आप आप को जिताना चाहते हैं तो बीजेपी कांग्रेस जनता दल इन सबसे वोट ट्रांसफर हो कर आप के कहते मैं चले जायेंगे ,लेकिन  ये सब होगा तब  जब पोलिंग बूथ अफसर आपका हो। क्योंकि उसको ही उस बग को चालू करना होगा ।


ये स्टोरी  करीब ६ मंथ के बाद ztv पर टेलीकास्ट हुई। और उसके बाद ही किसी  के साथ मैंने  इस कहानी को शेयर किया । 
मैं कहूँगा कि हाँ evm के साथ छेड़ छाड़ की जा सकती हे । 
सफर का अंत 
कोई नहीं हे यहाँ संत 
क्योंकि यहाँ आस्तीन के सांप हैं अनंत 
कब कौन डस ले आपको 
काटे का इलाज़ नहीं होता हे तुरंत 
कोई नहीं हे यहाँ संत --
नीरज तिवारी 

 



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