रफ्ता - रफ्ता की यादों मैं बहुत कुछ है , उन्हीं धुंधली यादों मैं से एक याद हे | पाकिस्तान यात्रा की ...
तारीख तो मुझे याद नहीं लेकिन साल होगा 2003 ..अगर तारीख देखनी होगी तो पासपोर्ट को उलट - पलट कर देखना होगा |
शाम को करीब 4 बजे होंगे जब हम पाकिस्तान हाइ कमीशन मैं थे क्योंकि वीसा मिलना था लेकिन हम को बोला गया कि शाम को सात बजे आना |
वीसा तो मिल गया था लेकिन असल जद्दोजहद जाने की थी क्योंकि उस वक़्त हवाई रास्ता बंद था | ये भारत ओर पाक की सरकार का मामला था|
अगर पाक जाना हे ,तो दुबई से जाओ या फिर बाघा बार्डर से बस जाती हे| ओर अब उसका टिकिट मिलना मुशकिल क्योंकि बस पूरी फुल थी|
मुझे याद हे हम सभी सिर्फ भाग रहे थे , बस स्टॉप फिर बस स्टॉप से कहीं ओर मैं ओर मेरे साथी जो की मुझ से बहुत सीनियर थे | मुझे किसी बात की चिंता नहीं थी सारा मीडिया इसी जुगाड़ मैं लगा था की बस , सिर्फ बस हो जाए |तभी रात को करीब 9 बजे पता चला कि एक बस एक्सट्रा जाएगी | सभी के चहरे चमक गए जैसा मुझे पता चला कि इस सबके पीछे राजदीप जी ओर जसवंत जी की मेहनत थी |जो भी हो हम सब पाक जाने वाली बस मैं सवार हो गए ओर बस दिल्ली से वाघा बार्डर की तरफ चल दी |
ये सफर पूरी रात का था , हमारी बस के आंगे एक पुलिस की गाड़ी चल रही थी जो की किसी भी अनहोनी को रोक सके |
दरअसल भारत से कुछ नेता कुछ पत्रकार ओर भी कुछ लोंगों का डेलीगेसन पाक जा रहा था ओर मीडिया उनको कवर करने |
इस लिस्ट मैं बहुत सारे लोग थे लालू जी, राजीव शुक्ल जी ओर भी लेकिन सारा केंद्र बिन्दु थे लालू जी |
जहां तक मुझे याद हे उस डेलीगेसन का नाम सफमा था । फिलहाल रात का वक़्त था ओर बस तेज़ी से अपने गंतव्य की ओर जा रही थी | मेरे साथ वाली सीट पर एक लड़का बैठा हुआ था नाम मुझे नहीं याद ,लेकिन वो पाक से था ओर हिन्दू था | वो किस शहर मैं रहता था आज याद नहीं लेकिन उसके साथ जो बातें की उसकी कुछ यादें अब भी हैं | मुझे बताया की हमको भारत आने का वीसा बहुत मुश्किल से मिलता हे हम जब वीसा की लाइन मैं लगे होते हैं मारा जाता हे | ओर भी बातें हुई ओर उसने कभी ये नहीं कहा की हमारा पाक, नापाक हे | सुबह हम बार्डर पर थे |ओर हम सबको बस से उतार कर एक बस मैं शिफ्ट कर दिया क्योंकि पैदल बार्डर को क्रॉस कर नहीं सकते थे | सभी बस मैं खड़े हो कर बार्डर को क्रॉस किया जो भी खाना पूरी
तारीख तो मुझे याद नहीं लेकिन साल होगा 2003 ..अगर तारीख देखनी होगी तो पासपोर्ट को उलट - पलट कर देखना होगा |
शाम को करीब 4 बजे होंगे जब हम पाकिस्तान हाइ कमीशन मैं थे क्योंकि वीसा मिलना था लेकिन हम को बोला गया कि शाम को सात बजे आना |
वीसा तो मिल गया था लेकिन असल जद्दोजहद जाने की थी क्योंकि उस वक़्त हवाई रास्ता बंद था | ये भारत ओर पाक की सरकार का मामला था|
अगर पाक जाना हे ,तो दुबई से जाओ या फिर बाघा बार्डर से बस जाती हे| ओर अब उसका टिकिट मिलना मुशकिल क्योंकि बस पूरी फुल थी|
मुझे याद हे हम सभी सिर्फ भाग रहे थे , बस स्टॉप फिर बस स्टॉप से कहीं ओर मैं ओर मेरे साथी जो की मुझ से बहुत सीनियर थे | मुझे किसी बात की चिंता नहीं थी सारा मीडिया इसी जुगाड़ मैं लगा था की बस , सिर्फ बस हो जाए |तभी रात को करीब 9 बजे पता चला कि एक बस एक्सट्रा जाएगी | सभी के चहरे चमक गए जैसा मुझे पता चला कि इस सबके पीछे राजदीप जी ओर जसवंत जी की मेहनत थी |जो भी हो हम सब पाक जाने वाली बस मैं सवार हो गए ओर बस दिल्ली से वाघा बार्डर की तरफ चल दी |
ये सफर पूरी रात का था , हमारी बस के आंगे एक पुलिस की गाड़ी चल रही थी जो की किसी भी अनहोनी को रोक सके |
दरअसल भारत से कुछ नेता कुछ पत्रकार ओर भी कुछ लोंगों का डेलीगेसन पाक जा रहा था ओर मीडिया उनको कवर करने |
इस लिस्ट मैं बहुत सारे लोग थे लालू जी, राजीव शुक्ल जी ओर भी लेकिन सारा केंद्र बिन्दु थे लालू जी |
जहां तक मुझे याद हे उस डेलीगेसन का नाम सफमा था । फिलहाल रात का वक़्त था ओर बस तेज़ी से अपने गंतव्य की ओर जा रही थी | मेरे साथ वाली सीट पर एक लड़का बैठा हुआ था नाम मुझे नहीं याद ,लेकिन वो पाक से था ओर हिन्दू था | वो किस शहर मैं रहता था आज याद नहीं लेकिन उसके साथ जो बातें की उसकी कुछ यादें अब भी हैं | मुझे बताया की हमको भारत आने का वीसा बहुत मुश्किल से मिलता हे हम जब वीसा की लाइन मैं लगे होते हैं मारा जाता हे | ओर भी बातें हुई ओर उसने कभी ये नहीं कहा की हमारा पाक, नापाक हे | सुबह हम बार्डर पर थे |ओर हम सबको बस से उतार कर एक बस मैं शिफ्ट कर दिया क्योंकि पैदल बार्डर को क्रॉस कर नहीं सकते थे | सभी बस मैं खड़े हो कर बार्डर को क्रॉस किया जो भी खाना पूरी
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